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वैज्ञानिकों ने CORONA VIRUS के सम्बन्ध में 3 आश्चर्यजनक बातें बतायी।

वैज्ञानिकों ने corona virus के उन 3 स्टेप के  बारे में बताया है कि, शरीर को ये वायरस कैसे प्रभावित करता है?


1:- यह संक्रमण बॉडी में, ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है:- वैज्ञानिकों ने बताया है कि यह वायरस जब भी किसी व्यक्ति को अपना शिकार बनता है तो यह उसके शरीर में होने वाले ऑक्सीजन सप्लाई को रोक देता है, जैसे की उसके फेफड़ों में बलगम कि मात्रा को बड़ा देता है जिससे फेफड़ों में उपस्थित ऑक्सीजन छिद्र बंद हो जाते है और हमारे बॉडी की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन सप्लाई नहीं हो पाती है, जिसकी वजह से व्यक्ति को सास  लेनेेेेे में दिक्कत होती हैं, और सांस फूलने लगती है, जिसकी वजह से वह जल्दी जल्दी सास लेना शुरू कर देता है, और कुछ ही दिनों बाद  घुटन की वजह से उसकी मृत्यु हो जाती है।

2:- खून के थक्के जमने लगते हैं:- अमेरिका के माउंट सिनाई हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट ने पाया कि किडनी में खून के थक्के जम रहे हैं और डायलसिस की प्रक्रिया बाधित हो रही है। मैकेनिकल वेंटिलेटर पर COVID-19 रोगियों की निगरानी करने वाले पल्मोनोलॉजिस्ट (श्वास-रोग विशेषज्ञ) ने देखा कि फेफड़े के हिस्से रक्तहीन थे। न्यूरोसर्जन्स ने खून के थक्के जमने की वजह से स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी, जिनमें कई कम उम्र के थे और कम से कम आधे लोग कोरोना पॉजिटिव निकले।

अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर जे मोक्को ने एक इंटरव्यू में कहा, 'यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि यह वायरस खून के थक्के बना सकता है' उन्होंने यह भी बताया कि कैसे कुछ केसों में कोरोना वायरस एक लंग डिजीज से बढ़कर है। एक कोरोना वायरस मरीज में पहला लक्षण स्ट्रोक के रूप में सामने आया। 

कई विशेषज्ञों ने जब खून के थक्कों का बनना देखा तो इलाज के प्रोटोकॉल में बदलाव किया गया। अब मरीजों को खून पतला करने के लिए भी दवा दी जा रही है। हॉस्पिटल के प्रमुख डॉ. डेविड रेच ने कहा, 'यदि आप खून का थक्का नहीं बनने देते हैं तो खतरा कम हो जाता है।' हालांकि, नए प्रोटोकॉल के तहत हाई रिस्क मरीजों को खून पतला करने की दवा नहीं दी जा रही है क्योंकि इससे मस्तिष्क या दूसरे अंगों में ब्लीडिंग हो सकती है। 

मध्य में तीन सप्ताह में मोक्को ने देखा कि स्ट्रोक के 31 मरीजों के मस्तिष्क में खून के बड़े थक्के थे। आमतौर पर इतने दिनों मे जितने मरीज आते थे उनसे यह संख्या दोगुनी थी। इनमें से 5 की उम्र 49 से कम थी। कम उम्र के लोगों में स्ट्रोक का खतरा कम होता है। एक मरीज की उम्र तो 31 ही थी। इनमें से आधे मरीज कोरोना संक्रमित निकले।

पेट की आंतों में इन्फेक्शन:-

कोविड 19 वायरस पेट की आंतों में अल्सर बना देता जिसके चलते आंतों में छोटे या बड़े घाव बन जाते हैं, पेट में बहुत दर्द होता है, और उन घावों से खून रिश्ता है जिससे कि शरीर में खून की कमी होने लगती है और करोना वायरस संक्रमित व्यक्ति कमजोर होने लगता है। corona वायरस  आंत की कोशिकाओं को डैमेज कर देता है जिससे अल्सर हो जाता है। और खून रिसने लगता है।

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